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उजान
गोलीकांड : मौत को लेकर अब होगी प्राथमिकी
11/03/2007 12:13:01 PM +0530
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दरभंगा। उजान गोलीकांड
को लेकर पदाधिकारियों द्वारा दर्ज दो मुकदमों को सरकार द्वारा वापस लेने की
घोषणा के बीच दरभंगा प्रक्षेत्र के आईजी आरएल कनौजिया ने एसपी को भेजे पत्र में
स्पष्ट किया है कि गांव में वर्ष 2004 में बाढ़ राहत मांग रहे ग्रामीणों पर हुई
पुलिस फायरिंग प्रशासनिक विफलता को दबाने के लिए की गयी थी और इसमें शक्ति बल
का खुलकर दुरुपयोग हुआ। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का अविश्वास तो बढ़ा ही,
साथ ही यह कार्रवाई निरीह ग्रामीणों को उग्रवाद की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित
करेगा। आईजी ने मनीगाछी प्रखंड के सकतपुर थाना अंतर्गत वर्ष 2004 में हुए उजान
गोलीकांड में बेनीपुर के तत्कालीन डीएसपी की पर्यवेक्षण रिपोर्ट पर कड़ी टिप्पणी
की है तथा उनसे स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आईजी के पत्र
में ग्रामीणों की मौत के मामले में जिम्मेवार लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने का
स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि बाढ़ राहत की मांग पर हुए आंदोलन के बीच पुलिस ने उजान में 16
अगस्त, 04 को करीब डेढ़ दर्जन से ऊपर राउंड गोलियां चलायी थीं, जिसमें गांव के
श्यामसुंदर कामती व बालक बब्लू कामती की मौत घटनास्थल पर ही हो गयी थी। ग्रामीणों
ने दोनों को शहीद का दर्जा दे रखा है। घटना को लेकर सकतपुर थाने में तीन प्रमुख
प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। पहली प्राथमिकी में मनीगाछी के तत्कालीन बीडीओ
लाल बहादुर सिंह के बयान पर 56 लोगों को तथा दूसरी प्राथमिकी (37/04) में
तत्कालीन सीओ एमए एजाजी के बयान पर 61 लोगों को नामजद किया गया था। इसी तरह
तीसरी प्राथमिकी (38/04) में उजान के तत्कालीन मुखिया रामशरण लाल व उसके पुत्र
अमर लाल समेत अन्य को अभियुक्त बनाया गया था।
आईजी श्री कनौजिया ने एसपी को भेजे पत्र में स्पष्टत: लिखा है कि उक्त कांड
संख्या 36 व 37/04 प्रशासनिक विफलता को दबाने के लिए पर्याप्त है। ऐसी स्थिति
में 38/04 के प्राथमिकी अभियुक्त मुखिया व उसके पुत्र की गिरफ्तारी सुनिश्चित
करायी जाये। आईजी ने लिखा है कि बीडीओ श्री सिंह व सीओ श्री एजाजी ने सैकड़ों की
भीड़ में सभी अभियुक्तों को स्वयं कैसे पहचान लिया। इतना ही नहीं दोनों
पदाधिकारियों द्वारा दर्ज कराये गये मामले में अभियुक्तों की गिरफ्तारी का आदेश
देना पूरी तरह अनुचित माना जायेगा। आगे बेनीपुर के तत्कालीन डीएसपी द्वारा दी
गयी पर्यवेक्षण टिप्पणी (901/06, दिनांक-5.8.06) पर कई सवाल उठाते हुए आईजी ने
लिखा है कि गोलीबारी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों व दोनों वादियों के जख्मों
के बारे में पर्यवेक्षण टिप्पणी में कोई चर्चा तक नहीं है, जबकि बदन पर पाये गये
जख्म के बारे में पर्यवेक्षण टिप्पणी में अंकित किया जाना जरूरी था। इतना ही नहीं
तमाम जख्मियों का बयान भी पर्यवेक्षण टिप्पणी में उल्लेखित नहीं है जबकि
प्राथमिकी में बीएमपी-13 के हवलदार हर्ष बहादुर राजा, आरक्षी शैलेश कुमार अकेला,
लक्ष्मण भगत, देवेन्द्र मिश्र, एसआई हरि राम (तत्कालीन थाना प्रभारी, मनीगाछी),
एएसआई रामकिशुन पासवान, राजेन्द्र प्रसाद यादव, सीताराम राउत, एसआई उपेन्द्र
कुमार (तत्कालीन थाना प्रभारी, सकतपुर), एसआई श्यामकिशोर महतो (तत्कालीन थाना
प्रभारी, बहेड़ा), वादी एमएए एजाजी तथा लाल बहादुर सिंह को जख्मी बताया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि आईजी ने लिखा है कि मृत श्याम सुंदर कामती व बब्लू कामती
की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में भी डीएसपी की पर्यवेक्षण टिप्पणी में अंकित
नहीं है। इतना ही नहीं दोनों की हुई मौत के मामले में अलग से धारा 304 भादवि
में फायरिंग में शामिल पुलिस पार्टी के विरूद्ध कांड अंकित कर अनुसंधान किया
जाना आवश्यक था, जो नहीं हो पाया। इस मामले में नये सिरे से प्राथमिकी दर्ज करने
के साथ ही कांड संख्या 38/04 के प्राथमिकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित
कराकर आरोप पत्र समर्पित करने का भी आदेश आईजी कनौजिया ने दिया है। यहां यह
उल्लेख जरूरी है कि वर्ष 2004 में दरभंगा जिला में प्रलयंकारी बाढ़ आयी थी,
जिसमें उजान गांव भी पूरी तरह तहस-नहस हो गया था। 9 अगस्त 2004 को मुखिया ने
335 क्विंटल गेहूं का ग्रामीणों के बीच बंटवारे के लिए उठाव किया था। इसी गेहूं
के बंटवारे के लिए ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन किया था और आंदोलन को दबाने के लिए
हुई फायरिंग में उजान के दो लोगों की मौत हो गयी थी जिसके बाद पूरा इलाका महीनों
आंदोलनरत रहा। पुलिस व जिला प्रशासन छह दिनों तक ग्रामीणों के आक्रोश के कारण
घटनास्थल तक नहीं जा सके थे। इतना ही नहीं, चार दिनों तक दरभंगा-झंझारपुर
रेलखंड पर परिचालन पूरी तरह ठप रहा था और कई केंद्रीय नेताओं ने उजान जाकर
पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी थी।
जागरण दरभंगा
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